Internet

वर्ल्ड वाइड वेब

बिना टीसीपी/आईपी के इंटरनेट पर कंप्यूटरों के बीच डेटा का आदान-प्रदान असंभव होता है। वर्ल्ड वाइड वेब अब इंटरनेट का एक व्यावसायिक हिस्सा बन चुका है। वेब की खूबी यह है कि इस पर आप ग्राफिक्स और टैक्स्ट सभी कुछ पा सकते हैं। वेब रूट पते को इंटरनेट पर भेज देते हैं। और सही सर्वर तक पहुंचाते हैं, जब पेज और ग्राफिक्स व टेक्स्ट को इंटरनेट के सहारे उस कंप्यूटर तक भेज देता है, जिसने इसके लिए वेब पता भेजा था । फिर वेब ब्राउज़र इन सभी को प्राप्त करके सही क्रम में लगा देता है और स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देता है। जब वेब ब्राउज़र आपकी मांग को पूरा कर देता है, तब वह दूसरे कंप्यूटर से आए संदेश के लिए काम करता है। यदि आप उसी वेब सर्वर से दूसरा पेज लोड करने का अनुरोध करेंगे, तो यह सारी प्रक्रिया नए सिरे से होगी ।

इंटरनेट सूचना

इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा की तादाद की कल्पना कर पाना असंभव है। इंटरनेट पर डेटा मुख्य रूप से व्यावसायिक संस्थान, कंपनियां सरकारें और शिक्षण संस्थान उपलब्ध कराते हैं। कंपनियों और व्यावसायिक संस्थानों के लिए वेब पैसा कमाने का एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराती है। वेब के जरिए ये कंपनियां दुनियाभर में अपना बाजार तालाश कर उत्पाद बेचती हैं। अब तो तमाम कंपनियों व बड़े-बड़े डिपार्टमेंटल स्टोरों तक ने वेब पर अपना पूरा ब्यौरा डाल रखा है।

इस प्रकार कारोबारी दुनिया से संबंधित समस्त डेटा आपको वेब पर मिल जाएगा। इसी तरह संघीय, राज्य सरकारों व स्थानीय प्रशासन की अपनी वेबसाइट होती हैं। वेब के जरिए तो अब टैक्स अदा करने की भी सुविधा है। शिक्षा संस्थानों ने भी इंटरनेट पर काफी सारे डेटा डाले हैं। बुनियादी जानकारी ले लेकर दुनियाभर में हर क्षेत्र में हर विषय में चल रहे शोध, हो चुके शोध आदि सबकी जानकारी इंटरनेट पर मिलेगी।

इंटरनेट का संचालन

आधुनिक उपकरणों की मदद से इंटरनेट का संचालन काफी आसान काम है। इंटरनेट से जुड़ने के कई तरीके हैं आइये इन तरीकों पर एक नज़र डालते हैं-

माॅडेम: इंटरनेट तक पहुुंच के लिए सबसे आसान रास्ता टेलीफोन लाइन है। माॅडेम हार्डवेयर का वह हिस्सा होता है, जो कंप्यूटर डेटा को सिग्नलों में परिवर्तित कर देता है और ये सिग्नल टेलीफोन लाइन से चले जाते हैं। माॅडेम आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता के माॅडेम को डायल करता है और उससे कनेक्शन जुड़ जाता है। फिर इंटरनेट सेवा प्रदाता का कंप्यूटर आपको इंटरनेट से जोड़ देता है और आपके डेटा को इंटरनेट पर उचित सर्वर के पास भेज देता है।

लोकल एरिया नेटवर्क: कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को कंपनी के लोकल एरिया नेटवर्क के जरिए इंटरनेट से जुड़ने की सुविधा देती हैं। बड़ी कंपनियों के पास तो प्रायः अपने ही इंटरनेट सर्वर होते हैं, जो नेटवर्क के साथ जुड़कर सभी सक्रिय इंटरनेट कनेक्शनों को उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में जब आप नेटवर्क से जुड़े होते हैं और आपके पास सही सॉफ्टवेयर है, तो आप लोकल एरिया नेटवर्क के जरिए इंटरनेट से आसानी से जुड़ सकते हैं।

इंटरनेट के डोमेन

टीएलडी: ये टाॅप लेवल डोमेन हैं जो यूआरएल के अंत में प्रत्यय के रूप में लगते हैं। उदाहरण के लिए, www.edudose.com में .com टीएलडी है। इस समय .com के अलावा जो टीएलडी उपलब्ध हैं, उनमें .net, .org, .gov, .edu और .mil हैं।

जीटीएलडी: जेनेरिक टाॅप लेवल डोमेनों का पूर्व जातीय नाम होता है। जैसे www.books.com, www.music.com कोई भी इन्हें फौरन किसी कंपनी या व्यक्ति से नहीं जोड़ सकता। लेकिन सामान्य रूप में ये एक वर्ग को प्रदर्शित करते हैं।

सीटीएलडी: कंट्री टाॅप लेवल डोमेन। ये डोमेन नाम विशिष्ट देशों को ही दिए जाते हैं। उस देश में जो संबंधित नियामक संस्था होती है, वही इन पर नियंत्रण रखती है। उदाहरण के लिए, भारत के लिए in, फ्रांस के लिए .fr कनाडा के लिए .cd ब्राजील के लिए .br आदि।

सर्च इंजन

इंटरनेट सूचनाओं का भंडार है। दुनिया का शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा होगा, जिसके बारे में इंटरनेट पर जानकारी नहीं उपलब्ध है। चिकित्सा से लेकर शिक्षा इंजीनियरिंग से लेकर सामयिकी तक हर विषय के लिए ढेरांे सूचनाएं वेब पर उपलब्ध हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों की पहंुच इन सूचनाओं तक नहीं हो पाती है। इंटरनेट सर्पिंफग करने वाले लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं है कि इन सूचनाओं तक आसानी से कैसे पहुंचा जा सकता है। इसलिए ज्यातातर नेट सर्पफर कुछ खास साइटों तक ही सीमित होते हैं और अपनी जरूरत की सूचनाओं के लिए इन्हीं पर आश्रित होते हैं। जबकि हकीकत यह है कि अगर नेट सर्पिंफग के लिए मौजूद समाधानों का तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो बहुत आसानी से दुनिया भर की सूचनाएं बहुत कम समय में हासिल की जा सकती हैं। नेट सर्पिंफग को आसान बनाने और अपनी जरूरत की सूचनाओं को आसानी से हासिल करने के लिए सबसे उपयोगी समाधान है सर्च इंजन। भारत में चूंकि यह बहुत लोकप्रिय नहीं हुआ है, इसलिए भारत केन्द्रित सर्च इंजनों की कमी है, लेकिन दुनिया के कुछ महत्वपूर्ण सर्च इंजनों जैसे-याहू, एमएसएन, गूगल्स आदि पर भारत के बारे में भी ढेरों सूचनाएं दर्ज हैं। अगर इन सर्च इंजनों का इस्तेमाल समझ के साथ किया जाए तो कम समय में ज्यादा सूचनाएं हासिल की जा ती हैं।

जैसे-जैसे सर्च इंजनों की लोकप्रियता बढ़ रही है, वेब कंपनियां खुद को सर्च इंजनों पर दर्ज करने की कोशिशें तेज कर रही हैं। ज्यादातर वेब कंपनियां, वेबसाइट, कंटेंट तैयार करने वाली कंपनियां, नेट अखबार, नेट पत्रिकाएं आदि अपनी ज्यादा-से-ज्यादा सूचनाओं को लोगों तक पहंुचाने के लिए सर्च इंजन पर खुद को दर्ज करा रही हैं। इनका लाभ यह होता है कि सर्च इंजन के जरिए जरूरी सामग्री की खोज कर रहा उपयोक्ता उनकी साइट पर पहंुचता है। जिससे उनके उपयोक्ताओं की संख्या में इजाफा होता है। ज्यादा-से-ज्यादा उपयोक्ताओं को अपनी ओर खींचने के लिए वेबसाइट अपनी सूचनाओं को सर्च इंजन पर ऐसे दर्ज कर रही हैं, जिससे उपयोक्ता आसानी से वहां तक पहंुच सके। इसका सीधा मतलब यह है कि उपयोक्ता को अपनी जरूरत की सूचना तलाश करने के लिए किसी तकनीकी जटिलता में नहीं पड़ना है, बल्कि उसको सीधे अपनी जरूरत की चीज का नाम दर्ज करना है। अगर उपयोक्ता को किसी बहुत छोटी चीज की तलाश करनी है तो उसे उस छोटी चीज का नाम भी सर्च इंजन में डालने से नहीं हिचकना चाहिए। लेकिन इससे भी पहले उपयोक्ता को अपनी जरूरत के सर्च इंजन में डालने से नहीं हिचकना चाहिए। लेकिन इससे भी पहले उपयोक्ता को अपनी जरूरत के सर्च इंजन की भी पहचान होनी चाहिए। अपनी सूचना तलाश करने से पहले सबसे जरूरी सर्च इंजन की पहचान है। इंटरनेट पर सूचनाओं की तलाश को आसान बनाने के लिए मूल रूप से तीन किस्म के समाधान हैं- इनमें पहला है सर्च इंजन, दूसरा है सब्जेक्ट डायरेक्टरी और तीसरा है मेटा सर्च इंजन।

सब्जेक्ट डायरेक्टरी

जैसा कि इसके नाम से ही साफ है, यहां खास विषयों की साइटों के लिए अलग-अलग समूह होते हैं। उपयोक्ता को जिस विषय से जुड़ी सामग्री चाहिए होती है, उसकी तलाश के जवाब में उसी विषय से जुड़ी साइटों के पते उसे मिलते हैं। इनकी संख्या सर्च इंजनों के मुकाबले कम है क्योंकि यहां छोटी-छोटी चीजों को आसानी से नहीं खोजा जा सकता है। लेकिन इसका लाभ यह है कि उपयोक्ता को अपनी जरूरत की चीज के लिए बहुत भटकना नहीं पड़ता है। अगर किसी व्यक्ति को जीव-विज्ञान के बारे में जानकारी लेनी है तो वह सिर्फ बायोलाॅजी लिख कर ही अपनी जरूरत की साइटों तक पहंुच सकता है। वहां जाकर वह अपनी जरूरत की खास चीजों की तलाश कर सकता है। इसलिए अगर आपको विषय के बारे में बहुत जानकारी नहीं है, तो इसका इस्तेमाल ज्यादा लाभदायक होता है।

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