Important Facts

  • डाॅ डगलस (Dr. Douglas Engelbart) ने 1964 में माउस का आविष्कार किया।
  • प्रथम वेब साइट के निर्माण का श्रेय टिम बर्नस ली (Tim Berners Lee) को है। इन्हें World Wide Web का संस्थापक कहा जाता है।
  • बिल गेट्स तथा पाॅल एलेन ने मिलकर 1975 में माइक्रोसॉफ्ट काॅरपोरेशन की स्थापना की।
  • बिल गेट्स की प्रसिद्ध पुस्तक “The Road Ahead” 1995 में लिखी गई। वर्तमान में वे “Bill and Melinda Gates Foundation” द्वारा सामाजिक कार्यों में लगे हैं।
  • भारत के सबीर भाटिया (Sabeer Bhatia) ने फ्री ई-मेल सेवा हाॅटमेल (Hotmail) को जन्म दिया।
  • कैलकुलेटर तथा कम्प्यूटर में अंतर यह है कि कम्प्यूटर को एक साथ कई निर्देश या निर्देशों का समूह दिया जा सकता है तथा यह एक साथ कई कार्य कर सकता है। इसके विपरीत कैलकुलेटर को एक साथ एक ही निर्देश दिया जा सकता है।
  • प्रथम व्यवसायिक इंटीग्रेटेड चिप का निर्माण फेयर चाइल्ड सेमीकण्डक्टर काॅरपोरेशन (Fair Child Semiconductor Corporation) ने 1961 में किया।
  • माॅनीटर का आकार माॅनीटर के विकर्ण (Diagonal) की लम्बाई में मापा जाता है।
  • फ्लॉपी डिस्क का आविष्कार IBM के वैज्ञनिक एलान शुगार्ट (Alan Shugart) ने 1971 में किया।
  • मानव मस्तिष्क और कम्प्यूटर में सबसे बड़ा अंतर यह है कि कम्प्यूटर को स्वयं की सोचने की क्षमता नहीं होती।
  • डिजिटल काम्पैक्ट डिस्क (DCD) का आविष्कार 1965 में जेम्स रसेल ने किया।
  • जीएसएम (GSM-Global System For Mobile Communication) मोबाइल फोन के लिए प्रयुक्त एक लोकप्रिय मानक है।
  • सीडीएमए (CDMA-Code Division Multiple Access) मोबाइल नेटवर्क स्थापित करने की व्यवस्था है।
  • कम्प्यूटर के Standby Mode में माॅनीटर तथा हाॅर्ड डिस्क आॅफ हो जाता है ताकि कम ऊर्जा खपत हो। किसी भी बटन को दबाने या माउस क्लिक करने से कम्प्यूटर Standby Mode से बाहर आ जाता है।
  • आॅप्टिकल माउस (Optical Mouse): में माउस पैड की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि इसमें कोई घूमने वाला भाग नहीं होता

मेमोरी की इकाई – बिट और बाइट (Unit of Memory – Bits and Bytes)

8 लगातार बिटों को एक सीरीज कहा जाता है। इस सीरीज को फ्बाइटय् कहते हैं। बाइट सूचना की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। कम्प्यूटर की सारी क्रियाएँ बाइट में ही मापी जाती हैं।

कम्प्यूटर में स्टोर किया जाने वाला हर बाइट उसके लिए कच्चा माल है, जिसे किसी भी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कम्प्यूटर में डाटा के साथ हम दो तरह की क्रियाएं करते हैं- संख्याओं के साथ अंकगणितीय क्रियाएं तथा अक्षरों और चिन्हों के साथ कुछ दूसरी क्रियाएं। किसी बाइट में दोनों तरह के डाटा स्टोर किए जा सकते है। अन्तर सिर्फ उसके उपयोग करने में है। किसी बाइट में संख्या या चिर्,िं से पता चलता है कि आप उसे कैसे इस्तेमाल कर रहे है।

की- बोर्ड के सभी कैरेक्टर, जैसे सभी लेटर्स (अपरकेस और लोवरकेस चिन्हों), नम्बर और सिम्बल, आदि आठ बिटों के अलग-अलग समूहों से बने हैं। बाइट मेमोरी के साइज को मापने की इकाई है। मेमोरी का साइज किलोबाइट (KB), मेगाबाइट (MB), या गीगाबाइट (GB), में भी मापा जाता है।

  • 1 किलोबाइट =1024 बाइट
  • 1 मेगाबाइट=1024 किलोबाइट = (1024 × 1024) बाइट
  • 1 गीगाबाइट= 1024× 1024 किलोबाइट = (1024 × 1024 × 1024) बाइट

बाइनरी संख्याएँ (Binary Numbers)

आप जानते हैं कि दशमलव प्रणाली में कई संख्या लिखते समय दाईं और र्बाइं ओर अंकों का स्थान मान दस गुना होता जाता है जैसे इकाई (1), दहाई (10), सैकड़ा (100), हजार (1000), दस हजार (10000), लाख (100000), दस लाख (1000000) आदि। इसका कारण यह है कि उस संख्या प्रणाली का आधार (10) है, क्योंकि इसमें 10 अंकों (0. 1. 2. 3. 4. 5. 6. 7. 8 और 9) द्वारा ही सभी संख्याए.ं लिखी जाती हैं।

परन्तु बाइनरी प्रणाली का आधार 2 है क्योंकि उसमें सभी संख्याए.ं केवल 2 अंकों (0 तथा 1) द्वारा लिखी जाती हैं। इसलिए बाइनरी संख्या लिखते समय बिटों के स्थानीय मान दाईं ओर से र्बाइं ओर दो गुने होते जाते हैं, जैसे 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128 आदि। यहाँ किसी बाइट की हर बिट का स्थानीय मान (या संख्यात्मक मान) दिया गया है।

ध्यान दीजिए कि बिटों की क्रम संख्याएं दायीं ओर से बायीं ओर डाली गई हैं ओर शुरूआत 0 से की गई है। किसी बिट की क्रम संख्या का उसके मान से सीधा सम्बन्ध है। हर बिट की संख्यात्मक मान 2 पर उसकी क्रम संख्या के घात के बराबर है। उदाहरण के लिए बिट संख्या 3 का मान 23 यानी 8 है। इसी तरह आप दूसरे बिटों के बारे में समझ सकते हैं।

कम्प्यूटरों में सभी संख्याओं को बाइनरी रूप में ही रखा जाता है और इसी रूप में इन पर जोड़ना घटाना आदि अंकगणितीय क्रियाएं की जाती है। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि किसी भी संख्या को बाइनरी में लिखा जा सकता है।

किसी भी दशमलव संख्या को बाइनरी संख्या में बदला जा सकता है। उसका एक विशेष तरीका है। यहाँ हम केवल पहली 16 दशमलव संख्याओं के बराबर बाइनरी संख्याएं दे रहे हैं

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