Computer Virus

वायरस प्रजातियों का मूल

वायरसों के बारे में जागरूकता पिछले 10 सालों में ही ज्यादा आई है। यंू तो 1960 के आसपास में ही इनकी मौजूदगी मानी जाती है। पहले के जो वायरस वर्जन थे, वे शोध सुविधाओं में सिर्फ टेस्ट प्रोग्राम के रूप में ही थे। लेकिन 1980 के उत्तरार्ध में मुख्यरूप से विश्वविद्यालयों के कंप्यूटर और शोध केंद्रो में ही यह समस्या आई। तब ये वायरस बहुत धीरी-धीरे स्नीकर-नेट से होते हुए संक्रमित फ्लॉपी से घुस जाते थे। पर 1990 के मध्य में वायरस लेखन में दो बड़े क्रांतिकारी बदलाव आए।

जैसे दुनिया में जैविक वायरस सबसे ज्यादा हवाई जहाजों व अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन बढ़ने से फैले, वैसे ही इंटरनेट और ई-मेल कंप्यूटर वायरसों को फैलाने वाला सबसे तेज माध्यम रहा। और इंटरनेट के जरिए फैले इन वायरसों ने दुनिया की लाखों मशीनों को संक्रमित कर डाला। सन् 1995 में माइक्रोसॉफ्ट ने मैक्रो कमांड लिखने के लिए एक टेक्स्ट आधारित प्रोग्रामिंग भाषा वर्ड बेसिक पेश की, जिससे कि वायरस लिखना काफी आसान हो गया।

पहला मैक्रो वायरस 1995 में सामने आया। 1998 तक इनकी तादाद बढ़कर एक हजार से ज्यादा पहंुच गई। लेकिन तब वायरस फैलने की गति इतनी बढ़ गयी थी कि संक्रमित फ्लॉपी डिस्क या संक्रमित ई-मेल अटैचमेंट से ही ये फैलते थे। यदि कोई उपयोक्ता, किसी दूसरे को डिस्क या अटैचमेंट नहीं देता, तो वायरस नहीं फैलता। हालांकि 1998 में मैलिसा वायरस आया और फिर उपयोक्ता के लिए इन सबका कोई मतलब नहीं रह गया था।

मैलिसा का योगदान

मैलिसा ई-मेल अटैचमेंट के रूप में आया। जैसे ही प्राप्तकर्ता अटैचमेंट पर क्लिक करता, वायरस आउटलुक के जरिए खुद प्राप्तकर्ता की एड्रेस बुकी पहली 50 प्रविष्टियों तक पहंुच जाता। यह वायरस एक शुक्रवार को फैलना शुरू हुआ और अगले सोमवार तक ढाई लाख कंप्यूटरों तक पहुंच गया। इससे तमाम कंपनियों के मेल सिस्टम बैठ गए और संघीय सरकार ने जांच शुरू की। एक कंपनी को दो घंटे भर के भीतर वायरस की 32 हजार काॅपियां मिली।

एक साल बाद जो लवलेटर वायरस आया, वह उपयोक्ता को आउटलुक बुक में दर्ज हरेक पते को खुद ई-मेल हो जाता था। प्रबंधकर्ताओं ने संक्रमित ई-मेल सिस्टमों को तेजी से बंद किया। इन लोगों ने हरेक उपयोक्ता के आउट बाक्स में जाम करने वाले वायरस की 600 प्रतियां पाई। हालांकि मैलिसा और लवलेटर वायरस बहुत तेजी से फैलने वाले थे और साफ-साफ मुसीबत में डालने वाले भी। न तो ये उपयोक्ता की हार्ड ड्राइवों को नष्ट करते थे, न ही सिस्टम को निष्क्रिय करते थे। साइमनरैक के राॅन माॅटिज़ कहते हैं कि जो सुपरवायरस होगा, उसमें इतनी जबर्दस्त क्षमता होगी कि बहुत कम समय में ही भारी नुकसान कर देगा।

अगली पीढ़ी के वायरस

वायरसों के भविष्य के बारे में कुछ भी कह पाना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन यह पक्की बात है कि आने वाले समय में इनसे निपट पाना और भी कठिन होगा तथा ये और भी ज्यादा हानिकारक साबित हांेंगे। नई तकनीकियां और सॉफ्टवेयर जो आ रहे हैं उनमें कोई-न-कोई ऐसी खामी रह ही जाती है, जिससे वायरसों का फैलना और आसान हो जाता है। इसलिए वायरसरोधी तकनीकियों पर भी काफी ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए।

कंप्यूटर वायरस शब्द देने वाले व सुरक्षा विशेषज्ञ प्रफेड कोहेन का कहना है कि वायरस की प्रकृति, उसके रूप तो निरंतर विकसित होते जाएंगे। वे कहते हैं यह असंभव सा ही है कि कोई भी वायरस बना लेगा जो दुनिया के हर कंप्यूटर सिस्टम को खराब कर देगा। पर जो बहुत ही जटिल वायरस होंगे, वे लक्ष्य को ज्यादा तरीके से साध सकेंगे और उनका जीवनकाल भी लंबा होगा।

उपहारों वाले वायरस

आपके सिस्टम में कोई वायरस/ट्रोज़न हाॅर्स छ$ वेश में जैसे इलेक्ट्राॅनिक नियंत्रण या ग्रीटिंग कार्ड के रूप में आ सकता है। ई-मेल में हाइपरलिंक पर क्लिक करके, आपको एक ऐसी साइट वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। यहां रुज़ कोड आपके सिस्टम को चुपचाप फाइल अपलोड करने का निर्देश देंगे। विशेषज्ञ लाइनक्स आपरेटिंग सिस्टम के लिए वायरस लिखने वालों के बारे में भी पूर्वानुमान लगा चुके हैं और इसे गंभीर चुनौती के रूप में ले रहे हैं।

जब उपयोक्ताओं और कंपनियों को वायरसों से खतरा काफी बढ़ने लगा, तो इसमें सबसे बड़ा खतरा मैलिशियस कोड का ही सामने आया, जो कि साइबर आतंकवाद में प्रयुक्त होता है। रूसी नेता व्लादिमीर झिरिनोव्स्की ने अपने में सार्वजनिक रूप से यह कहा कि हमलावर वायरस/ट्रोजन का उपयोग करके पश्चिम को उसके घुटनों के बल ले आना चाहिए और अब कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आज साइबर आतंकवाद ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है और यह भी संभव हो सकता है कि बड़े पैमाने पर विनाश करने वाले हथियार भी कंप्यूटर और इंटरनेट तकनीक पर आधारित हों।

भविष्य की रोकथाम

आप अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? वायरसरोधी सॉफ्टवेयर आपके लिए सबसे बढ़िया तरीका है। वायरसों का पता लगाने के लिए प्रोग्रामर दो तरीके इस्तेमाल करते हैं- एक स्कैनिंग और दूसरा अनुभवों के आधार पर। स्कैनिंग में हस्ताक्षरों को देखा है, जो कोड पंक्ति के रूप में होते हैं और यही कोड पंक्ति वायरस की पहचान करती है। जबकि आसामान्य गतिविधि की जांच के लिए अनुभव आधारित तरीके काम लाए जाते हैं। जैसे कोई एक प्रोग्रामर है जो आपकी विंडोज़ रजिस्ट्री के लिए लिखने की कोशिश करता है। यदि आपका एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपडेट है तो ज्ञान वायरसों को वह पहले ही पता लगा लेगा। ज्यादातर विक्रेता हस्ताक्षरों को हर हफ्रते अपडेट करते रहते हैं। लेकिन नए वायर बहुत ही तेजी से आगे निकल जाते हैं। अभी वायरस का पता लगाने और उसकी जांच करने में विक्रेता को एक से चार घंटे का समय लगता है। लेकिन लवलेटर जैसे वायरस को फैलने में तो कुछ ही सेकेंड लगते हैं।

  1. एंटीवायरस यूटिलिटी प्रयोग करें: एंटीवायरस यानी वायरसरोधी सॉफ्टवेयर सबसे जरूरी होता है और इसे आप अपनी पीसी में इंस्टाॅल कर सकते हैं। सेटअप के दौरान आप अपने विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। आपको पूर्णकालिक आॅटोमेटिक स्कैनिंग लेनी चाहिए, जिससे यूटिलिटी जिप और दूसरी फाइलों के कंटेंटों को जांच सकें। एंटीवायरस सॉफ्टवेयर विक्रेता अपने इन उत्पादों को अपग्रेड भी करते रहते हैं। अधिकतम सुरक्षा के लिए आपको भी अपना एंटीवायरस सॉफ्टवेयर समय-समय पर अपडेट करते रहना चाहिए। कुछ यूटिलिटी ऐसी होती हैं जो सूचनाएं मिलने पर अपने आप ही सॉफ्टवेयर को अपडेट कर सकती हैं।
  2. सॉफ्टवेयर अपडेट करें: आजकल ज्यादातर वायरस इंटरनेट के जरिए ही पहंुचते हैं। इसलिए अपने ई-मेल प्रोग्राम को हमेशा अपडेट रखें। माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक ई-मेल से आने वाले वायरसों से बचाव के लिए तरीके बताता है और माइक्रोसॉफ्ट नियमित रूप से नई सुरक्षा मुहैया कराता रहता है। वेब ब्राउज़र की अनदेखी न करें। जिन लोगों को आप नहीं जानते हैं, उनके अटैचमेंट को न खोलें। ऐसी कोई भी फाइल जो संदिग्ध लगे और जिस पर .vbs एक्सटेंशन हो, उसके बारे में विशेष रूप से चैकस रहे। फिर भी आपको लगता है कि फाइल ठीक है, तो इसे अपने ई-मेल प्रोग्राम के साथ न खोलें। इसे डिस्क पर सेव कर लें और वायरस स्कैनर से इसकी जांच करें।
  3. अपने नेटवर्क की सुरक्षा करें: नेटवर्क की सुरक्षा के लिए आप उन कुछ खास तरह के ई-मेल अटैचमेंटों को प्राप्त न करें, जो सिस्टम के लिए घातक हो सकते हैं। जैसे- .exe या .vbs फाइलें। सभी .doc फाइलों को बंद करके रखने से मैक्रो वायरसों से सुरक्षा में मदद मिल सकती है। लेकिन इससे काम की दक्षता पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। चाहे आप घरेलू पीसी उपयोक्ता हैं या कारपोरेट नेटवर्क, यदि भूल से, असावधानी से वायरस घुस जाता है, तो ऐसे में नियमित रूप से बैकअप जरूरी है।
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