Banking Ombudsman (बैंकिंग लोकपाल)

बैंकिंग लोकपाल

बैंकिंग लोकपाल योजना भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 1995 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 ए तहत पेश की गई थी।
• बैंकिंग लोकपाल योजना पहली बार 1995 में भारत में पेश किया गई और इसे 2002 में संशोधित किया गया था।
• वर्तमान बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 में शुरू की गई थी।
• 2002 से 2006 तक, लगभग 36,000 शिकायतें बैंकिंग लोकपाल के समक्ष पेश की गई थी।
• बैंकिंग लोकपाल को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त किया जाता है।
• बैंकिंग लोकपाल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी है। वह बैंकिंग सेवाओं में कुछ कमी के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतों का निवारण करता है।
• बैंकिंग लोकपाल के कार्यालय ज्यादातर राज्यों की राजधानियों में स्थित होते है।
• करीब 15 बैंकिंग लोकपाल नियुक्त किये जा चुके है।#1599A3
• सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अनुसूचित प्राथमिक सह – ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत आते हैं।
शिकायतों के आधार
एक शिकायतकर्ता निम्न आधार पर एक शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
• किसी भी चेक संग्रह, ड्राफ्ट, बिल आदि का गैर – भुगतान या भुगतान में अत्यधिक देरी
• छोटे मूल्य वर्ग के नोटों की किसी पर्याप्त कारण के बिना गैर स्वीकृति ।
• छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की स्वीकृति के लिए किसी भी प्रकार का चार्ज।
• आवक प्रेषण का गैर भुगतान या आवक प्रेषण के भुगतान में कोई देरी।
• यदिकोई भी बैंकिंग संगठन करों को स्वीकार करने में देरी या करों को स्वीकार करने से मना करता है।
• सरकारी प्रतिभूतियों को जारी करने में कोई देरी।
• सरकारी प्रतिभूतियों के मोचन याजारी करने से इनकार।
• किसी भी पर्याप्त कारण के बिना, बैंकरों द्वारा जमा खातों को बंद करना।
• किसी भी बैंकर द्वारा खातों को बंद करने के लिए मना करना।
• किसी भी बैंकर द्वारा जानबूझ कर खातों को बंद करने में देरी।
• बैंकिंग कोड्स और भारत के मानक बोर्ड के प्रावधानों का गैर अनुपालन।
• ड्राफ्ट जारी करने, भुगतानआदेश या बैंकर्स चेक का भुगतान करने में देरी या विफलता।
• काम का प्रदर्शन निर्धारित काम के घंटों के अनुसार नहीं हो।
• बैंक की कोई भी सुविधा प्रदान करने में देरी या विफलता।
• किसी भी कारण के बिना, जमा खातों को खोलने के लिए मना करना।
• ग्राहक को पर्याप्त पूर्व सूचनाके बिना, बैंकर द्वारा लगाए गए चार्ज।
• एटीएम / डेबिट कार्ड / क्रेडिट पर  दिशानिर्देश या भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों का उल्लंघन
• कार्ड आपरेशन।
• गैर – संवितरण या पेंशन के वितरण में देरी।

एक ग्राहक ऋण और अग्रिम के संबंध में सेवा में कमी के चलते निम्न आधारों पर एक शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
• बिना किसी वैध कारण केऋण के आवेदन को गैर – स्वीकृति।
•, भारतीय रिजर्व बैंक की किसी भी प्रकार की सिफारिशों, निर्देशका उल्लंघन
• ब्याज दरों पर रिजर्व बैंक के निर्देशों का गैर – पालन।
• ऋण आवेदनों की स्वीकृति में कोई भी देरी

 

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